Monthly Archives: नवम्बर 2008

सूनी राहों पर – बॉब डिलन के गीत की तर्ज़ पर

1980 के दशक के दौरान बॉब डिलन के इस मशहूर गाने का तरजुमा परचम मंडली के लिए किया गया था। इधर दो दशक से भी ज़्यादा समय ग़ुज़र जाने के बाद अपने चंद रैडिकल युवा साथियों के आग्रह पर उस … Continue reading

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हिन्दी के वर्जित प्रदेश में…

[यह लेख कुछ अरसा पहले वाक् पत्रिका के लिए लिखा गया था - पुराने दोस्त सुधीश पचौरी के इसरार पर। जब यह लेख लिख रहा था तब से अब तक हालात कुछ बदल चुके हैं। इसे लिखते वक़्त तक भी … Continue reading

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