सूनी राहों पर – बॉब डिलन के गीत की तर्ज़ पर

1980 के दशक के दौरान बॉब डिलन के इस मशहूर गाने का तरजुमा परचम मंडली के लिए किया गया था। इधर दो दशक से भी ज़्यादा समय ग़ुज़र जाने के बाद अपने चंद रैडिकल युवा साथियों के आग्रह पर उस पर दोबारा निगाह डालने पर लगा इस पर काफ़ी काम की ज़रूरत है। लिहाज़ा कुछ और सफ़ाई कर के छाप रहा हूँ। लोकेश और नवीन को इसके लिए ख़ास तौर पर शुक्रिया।
(बॉब डिलन के गीत ‘द आन्सर इज़ ब्लोइं इन द विंड’ से प्रेरित)

सूनी राहों पर कोई कब तक चले
इससे पहले वो इंसाँ कहलाए?
कितने सागर कोई फ़ाख़्ता उड़े
इससे पहले कि वो चैन पाए?
बारूद की बू फैली हर इक ओर
कैसे यारों अमन आने पाए?
हवाओं में यारों जवाब मिलेगा
फ़िज़ाओं में जवाब मिलेगा।

कितने बरस कोई पर्वत टिके
इससे पहले कि वो मिट जाए?
कितने युगों तक करें इंतज़ार
जब आज़ादरूहों की उठेगी फ़रियाद?
कब तक आख़िर कोई मुँह फेर कर
हक़ीक़त से दामन बचाए?
हवाओं में यारों जवाब मिलेगा
फ़िज़ाओं मे जवाब मिलेगा।

जंग के बादल हैं फैले हर सू
अँधेरों में ढका आसमान
और तबाही मची है घर घर में
आँखें अपनी खोलो ज़रा
औ’ कितनी और लाशों के अम्बार लगें
इससे पहले कि आप जान पाएँ?
हवाओं में यारों जवाब मिलेगा
फ़िज़ाओं में जवाब मिलेगा।

मूल अंगरेज़ी के बोल इस तरह हैं:

How many roads must a man walk down
Before you call him a man?
Yes, n how many seas must a white dove sail
Before she sleeps in the sand?
Yes, n how many times must the cannon balls fly
Before theyre forever banned?
The answer, my friend, is blowin in the wind,
The answer is blowin in the wind.

How many times must a man look up
Before he can see the sky?
Yes, n how many ears must one man have
Before he can hear people cry?
Yes, n how many deaths will it take till he knows
That too many people have died?
The answer, my friend, is blowin in the wind,
The answer is blowin in the wind.

How many years can a mountain exist
Before its washed to the sea?
Yes, n how many years can some people exist
Before theyre allowed to be free?
Yes, n how many times can a man turn his head,
Pretending he just doesnt see?
The answer, my friend, is blowin in the wind,
The answer is blowin in the wind.

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10 Responses to सूनी राहों पर – बॉब डिलन के गीत की तर्ज़ पर

  1. akshaya-mann says:

    SWAGAT HAI AAPKA BAHUT UMDA LIKHA HAI SUNDAR RACHNA……

  2. shobha says:

    बहुत अच्छा लिखा है। ब्लाग जगत में आपका स्वागत है।

  3. Yusuf says:

    ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है। यह कविता नहीं, यह विचारों की प्रतिबद्धता है।
    जंग के बादल हैं फैले हर सू
    अँधेरों में ढका आसमान
    और तबाही मची है घर घर में
    आँखें अपनी खोलो ज़रा
    -यह सिलसिला जारी रखें। हमारे ब्लॉग पर भी आएं।

  4. Aditya Nigam says:

    अक्षय, शोभा, शमा, गोविंद और अमित जी, बहुत बहुत शुक्रिया।

  5. Abhishek says:

    जंग के बादल हैं फैले हर सू
    अँधेरों में ढका आसमान
    और तबाही मची है घर घर में
    आँखें अपनी खोलो ज़रा
    औ’ कितनी और लाशों के अम्बार लगें
    इससे पहले कि आप जान पाएँ?
    इनके जवाब तो कई एक पुरे युग को चाहिए. स्वागत ब्लॉग परिवार और मेरे ब्लॉग पर भी.

  6. संगीता पुरी says:

    आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है। आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी बडी प्रतिष्‍ठा प्राप्‍त करेंगे। हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

  7. चिट्ठा जगत में आपका स्वागत है ।
    भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है ।
    लिखते रहिए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
    कविता,गज़ल,शेर आदि के लिए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
    मेरे द्वारा संपादित पारिवारिक पत्रिका भी देखें
    http://www.zindagilive.blogspot.com

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