Monthly Archives: मई 2010

पत्रकारिता के विश्वविद्यालय में संघ की घुसपैठ: शहनवाज़ नज़ीर

शहनवाज़ नज़ीर का गेस्ट पोस्ट। शहनवाज़ दैनिक भास्कर में अखबारनवीस हैं। नाम बृज किशोर कुठियाला, पैदाइश मार्च 1948 शिमला, तालीम समाजशास्त्र और मानवशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएट, पता फिलहाल भोपाल, पेशे से पत्रकारिता के पंडित हैं और तबियत से संघ के … Continue reading

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युद्ध के रूपक का जाल

अपने नए बंद के दौरान सी.पी.आई.( माओवादी) ने छत्तीसगढ़ और बंगाल में अर्ध-सैन्य बल के सदस्यों के साथ बस में सफ़र कर रहे साधारण ग्रामीणों की हत्या करने के बाद जो बयान दिया है उससे यह साफ़ है कि अभी … Continue reading

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सुपरहीरो की उदासी का सबब – अभय कुमार दुबे

[अभय कुमार दुबे का यह लेख नवभारत टाइम्‍स मे छपा था। यहाँ इसे दीवान लिस्‍ट के सौजन्‍य से पेश किया जा रहा है। सितम्बर 2008 मे! यह लेख क़ाफ़िला में छपा था। उनका यह आलेख अमरीकी पॉपुलर कलचर के कई किरदारो … Continue reading

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एक पुराने कॉमरेड की अंतिम यात्रा: सांत्वना निगम

निम्नलिखित कहानी सांत्वना निगम द्वारा भेजी गई एक आमंत्रित रचना है। नोट: फ़ायरफ़ॉक्स या ऑपेरा इस्तेमाल करने वाले पाठक कृपया पढ़ते वक़्‍त फ़ॉन्ट बढ़ाने के लिए ( Ctrl +) दबाएं। संस्मरण एक पुराने कॉमरेड की अंतिम यात्रा “साला भैंचो गॉरबाचोव, … Continue reading

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बीच का रास्ता नहीं होता, कॉमरेड!: ईश्वर दोस्त

ईश्‍वर दोस्त का यह लेख क़ाफ़िला में कुछ अरसा पहले छपा था। ध्रुवीकरण की खासियत यह होती है कि वह बीच की जगह तेजी से खत्म करता जाता है। चाहे वह सांप्रदायिक ध्रुवीकरण हो या अस्मिता पर आधारित या किसी … Continue reading

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सुन ओ बेरहम…: पॉल रॉबसन के ‘ओल मैन रिवर’ और भूपेन हाजरिका के ‘बिस्‍तीर्ण दुपारे’ की तर्ज़ पर

‘ओल मैन रिवर’ एक अमरीकी लोकगीत था जो दक्षिणी अमरीका के मिसिसिपी नदी वाले इलाक़ों में गाया जाता था। वैसे मूलत: यह गीत एक मशहूर रूसी लोकगीत ‘साँग ऑफ़ द वॉलगा बोटमेन’ का अमेरिकी संस्करण माना जाता है।  दक्षिण अमरीका … Continue reading

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