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- sadan jha on कल तोड़ी गई, आज बँटी हूँ
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Bhupen Hazarika Bistirno Dupare Ol' Man River Paul Robson अनुवाद अभय कुमार दुबे आर एस एस इतिहास इश्वर दोस्त ऑपरेशन ग्रीनहंट कम्युनिस्ट कुठियाला। माखननलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता वि वि क्रांति छत्तीसगढ़ नक्सलवाद बस्तर बाबरी मस्जिद उच्च न्यायालय मूव ऑन बैटमैन माओवादी संस्कृति समाज विज्ञान सांत्वना निगम सुपरहीरो हिन्दी हिन्दुस्तानी फ़ैंटम-
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Monthly Archives: मई 2010
पत्रकारिता के विश्वविद्यालय में संघ की घुसपैठ: शहनवाज़ नज़ीर
शहनवाज़ नज़ीर का गेस्ट पोस्ट। शहनवाज़ दैनिक भास्कर में अखबारनवीस हैं। नाम बृज किशोर कुठियाला, पैदाइश मार्च 1948 शिमला, तालीम समाजशास्त्र और मानवशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएट, पता फिलहाल भोपाल, पेशे से पत्रकारिता के पंडित हैं और तबियत से संघ के … Continue reading
Posted in Politics, Rightwatch
Tagged आर एस एस, कुठियाला। माखननलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता वि वि
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युद्ध के रूपक का जाल
अपने नए बंद के दौरान सी.पी.आई.( माओवादी) ने छत्तीसगढ़ और बंगाल में अर्ध-सैन्य बल के सदस्यों के साथ बस में सफ़र कर रहे साधारण ग्रामीणों की हत्या करने के बाद जो बयान दिया है उससे यह साफ़ है कि अभी … Continue reading
Posted in Countryside, Debates, Movements, Politics, Violence
Tagged ऑपरेशन ग्रीनहंट, बस्तर, माओवादी
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सुपरहीरो की उदासी का सबब – अभय कुमार दुबे
[अभय कुमार दुबे का यह लेख नवभारत टाइम्स मे छपा था। यहाँ इसे दीवान लिस्ट के सौजन्य से पेश किया जा रहा है। सितम्बर 2008 मे! यह लेख क़ाफ़िला में छपा था। उनका यह आलेख अमरीकी पॉपुलर कलचर के कई किरदारो … Continue reading
एक पुराने कॉमरेड की अंतिम यात्रा: सांत्वना निगम
निम्नलिखित कहानी सांत्वना निगम द्वारा भेजी गई एक आमंत्रित रचना है। नोट: फ़ायरफ़ॉक्स या ऑपेरा इस्तेमाल करने वाले पाठक कृपया पढ़ते वक़्त फ़ॉन्ट बढ़ाने के लिए ( Ctrl +) दबाएं। संस्मरण एक पुराने कॉमरेड की अंतिम यात्रा “साला भैंचो गॉरबाचोव, … Continue reading
Posted in Culture, Leftwatch, Politics
Tagged इतिहास, कम्युनिस्ट, क्रांति, सांत्वना निगम
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बीच का रास्ता नहीं होता, कॉमरेड!: ईश्वर दोस्त
ईश्वर दोस्त का यह लेख क़ाफ़िला में कुछ अरसा पहले छपा था। ध्रुवीकरण की खासियत यह होती है कि वह बीच की जगह तेजी से खत्म करता जाता है। चाहे वह सांप्रदायिक ध्रुवीकरण हो या अस्मिता पर आधारित या किसी … Continue reading
Posted in Debates, Leftwatch, Movements, Violence
Tagged इश्वर दोस्त, छत्तीसगढ़, नक्सलवाद, माओवादी
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सुन ओ बेरहम…: पॉल रॉबसन के ‘ओल मैन रिवर’ और भूपेन हाजरिका के ‘बिस्तीर्ण दुपारे’ की तर्ज़ पर
‘ओल मैन रिवर’ एक अमरीकी लोकगीत था जो दक्षिणी अमरीका के मिसिसिपी नदी वाले इलाक़ों में गाया जाता था। वैसे मूलत: यह गीत एक मशहूर रूसी लोकगीत ‘साँग ऑफ़ द वॉलगा बोटमेन’ का अमेरिकी संस्करण माना जाता है। दक्षिण अमरीका … Continue reading
Posted in Culture, Movements, Struggles
Tagged Bhupen Hazarika, Bistirno Dupare, Ol' Man River, Paul Robson
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