पत्रकारिता के विश्वविद्यालय में संघ की घुसपैठ: शहनवाज़ नज़ीर

शहनवाज़ नज़ीर का गेस्ट पोस्ट। शहनवाज़ दैनिक भास्कर में अखबारनवीस हैं।
नाम बृज किशोर कुठियाला, पैदाइश मार्च 1948 शिमला, तालीम समाजशास्त्र और मानवशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएट, पता फिलहाल भोपाल, पेशे से पत्रकारिता के पंडित हैं और तबियत से संघ के सिपाही। कुठियाला के कमान संभालने के बाद से माखन लाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एंव संचार विश्वविघालय की आबो हवा में घुटन का माहौल है लेकिन इस घुटन के खिलाफ बगावत का असर भी दिखने लगा है।

23 मार्च, भगत सिंह की शहादत के दिन छात्रों द्नारा विश्वविघालय की दीवारों पर चस्पा किए गए पर्चों को हटा दिया गया है, कैंटीन के खम्भे पर चिपकी पाश की कविता भी फट चुकी है लेकिन प्रवेश द्वार के उपर लगा एक पर्चा किसी तरह बच गया। यह पर्चा परिसर में आने जाने वालों का कुछ इस तरह स्वागत करता है, “मैं विरोध में हूं क्योंकि मुझे अपना होना प्रमाणित करना है, हमें समाज में ऊंच नीच की भावनाओं को बदलना होगा, संघर्ष ही हमें परिष्कृत बनाएगा, इंकलाब ज़िन्दाबाद”। यह पर्चा विश्वविघालय के कुलपति प्रोफेसेर बृज किशोर कुठियाला की कारगुजारियों के विरोध में लगाया गया है जो देश में पत्रकारिता के इकलौते विश्वविघालय को संघ की पाठशाला बनाने की फिराक़ में हैं।
आबोहवा बदलने के साथ विश्वविघालय के पाठ्यक्रम भी नए कलेवर के हो गए है। इस कलेवर में भगवा संगठनों का असर दिखता है। भगवा रंग के प्रतीक इस विश्वविद्यालय के नए सत्र की शरुआत एक भव्य यज्ञ से होगी । इस सत्र से शुरु हो रहे 14 नए पाठ्यक्रम में मीडिया प्रबंधन, मीडिया शोध, मनोरंजन संचार, कारपोरेट संचार में एमबीए कराया जाएगा। इसके अलावा भारतीय संचार परम्पराएं और योगिक स्वास्थ्य प्रबंधन एंव अध्यात्मिक संचार में पीजी डिप्लोमा दिया जाएगा। इन कोर्सेज़ को संचालित करने के लिए 50 ऐसे नए संकाय सदस्यों की भरती की जाएगी जो “राष्ट्रवादी” प्रष्ठभूमि के होगें। सूत्र बताते हैं कि भरती का उद्देश्य विश्वविघालय में अपने लिए एक मज़बूत लाबी तैयार करना है ताकि भविष्य में किसी भी कार्य योजना को आसानी से लागू किया जा सके। है। हाल ही में कुठियाला ने सौरभ मालवीय नाम के एक शख्स को अपने सहायक के तौर पर नियुक्त किया है। सौरभ इसी विश्वविघालय से “मीडिया और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद” पर पीएचडी कर रहा है और बीके कुठियाला उसके गाइड हैं। सौरभ और कुठियाला की यारी नई नहीं है। कुठियाला जब कुरुक्षेत्र विश्वविघालय के मीडिया विभाग में पढ़ाते थे तभी से सौरभ के गाइड हैं और कुलपति का पद धारण करने के बाद सौरभ को दिल्ली से भोपाल बुला लिया। दरअसल सौरभ मालवीय पीएचडी में दाखिला लेकर दिल्ली चला गया था और वहां भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर के लिए बतौर मीडिया प्रभारी काम कर रहा था। दिलचस्प है सौरभ मालवीय जिस विश्वविघालय से पीएचडी कर रहा है वहीं से एक कर्मचारी के रुप में 12000 रुपए की तनख्वाह भी उठा रहा है। कुलपति का दुलरुआ होने के नाते सौरभ विश्वविघालय के दीगर संसाधनों का भी उपभोग कर रहा है।

विश्वविघालय का भगवाकरण करने में जुटे कुठियाला उन छात्रों के भविष्य से भी खेल रहे हैं जो बड़ी मुश्किल से उच्च शिक्षा तक पंहुच पाते हैं। विश्वविघालय के मौजूदा छह कोर्सेज़ में हर साल करीब 250 छात्र छात्राएं प्रवेश पाते थे लेकिन नौकरी आधे फीसदी को भी नहीं मिल पाती थी। ऐसे में संचार परंपराएं और अध्यात्म प्रबंधन में डिप्लोमा करने वाले छात्र नौकरी के लिए किसका दरवाज़ा खट खटाएगें, एक बड़ा सवाल है। नौकरी के लिए परेशान कुछ छात्र अपनी फरियाद लेकर कुलपति के पास गए थे लेकिन निराश होकर लौटे। मीडिया में बीके कुठियाला की पंहुच कितनी है यह अलग बात है लेकिन कुलपति अपने चहेते छात्रों का प्लेसमेंट कराते हैं। हाल ही में उन्होने आडियो विज़ुअल विभाग के छात्र आशुतोष चतुर्वेदी को भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय कार्यालय के मीडिया सेल में प्लेस कराया है।

विश्वविघालय की फ़िज़ा बिगाड़ने की क्या तैयारी चल रही है इसका एक नमूना 17 मई को विश्वविघालय परिसर में पूर्व उप राष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत के निधन पर आयोजित शोक सभा में देखने को मिला। इस दौरान छात्रों को एक प्रश्नावली बांटी गई जिसका शीर्षक गीता में संचार तत्वों का विश्लेषण था। इस प्रश्नावली में कुल 20 प्रश्न पूछे गए थे। प्रश्न संख्या 15 में पूछा गया है कि, क्या आपको लगता है कि गीता में जब अर्जुन धनुष त्यागकर युद्ध करने से मना कर देता है तब वह अवसाद की स्थिति में चला जाता है। प्रश्न संख्या 16, क्या कृष्ण के संचार के कारण ही वह प्रेरणा लेकर युद्ध के लिए पुनः तैयार होता है। प्रश्न संख्या 18, गीता में जो संदेश है क्या वह संचार की दृष्टि से वर्तमान में प्रासंगिक है। प्रश्न संख्या 19, क्या संचार या जनसंचार के पाठ्यक्रमों में गीता को शामिल किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि विश्वविघालय में इस साल से शुरु हो रहे 14 नए कोर्सेज़ के लिए पाठ्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं। संचार परम्पराएं और योगिक स्वास्थ प्रबंधन एंव अध्यात्मिक संचार जैसे डिप्लोमा कोर्सेज़ के पाठ्यक्रम में गीता को शामिल करने की तैयारी चल रही है। यही नहीं विश्वविघालय में एम. फिल का कोर्स भी शुरु किया गया है जिसमें सदंर्भ पुस्तक के रुप में एकात्म मानववाद को शामिल किया गया है। इस सिद्धांत के जनक पंडित दीन दयाल उपाध्याय थे जो जनसंघ के संस्थापक सदस्य होने के साथ साथ पहले महासचिव थे और बाद में जनसंघ के अध्यक्ष बने।

माखन लाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एंव संचार विश्वविघालय में ब्रज किशोर कुठियाला की ताजपोशी 19 जनवरी 2010 को हुई और उसी दिन से विश्वविघालय में नई परम्पराएं गढ़ी जाने लगीं। 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के दिन सबसे पहले वंदे मातरम का पाठ हुआ, फिर झंडा रोहण और अंत में राष्ट्रंगान। 30 जनवरी को माखन लाल चतुर्वेदी की पुण्य तिथि पर हुए कार्यक्रम की शुरुआत भी वंदे मातरम से हुई। विश्वविघालय में अब गोष्ठी, सेमिनार या फिर किसी भी कार्यक्रम से पहले वंदे मातरम का पाठ ज़रुरी है। विश्वविघालय में संघ परिवार की सीधे तौर पर आमद भी हो चुकी है। 8 मार्च 2010, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर कुठियाला के निजी कांफ्रेसं रुम में मीडिया की नवीन दिशाएं विषय पर एक गोपनीय कार्यक्रम हुआ। कवरेज के लिए गए विश्वविघालय के इलेक्ट्रानिक्स विभाग के छात्रों को कुठियाला ने मना कर दिया। निजी कांफ्रेसं रुम में छात्रों और संकाय सदस्यों का प्रवेश प्रतिबंधित करके मीडिया की कौन सी नवीन दिशाएं तय की जा रही थीं इसकी तहक़ीकात ज़रुरी है।

बीके कुठियाला की नियुक्ति के बाद परिसर में आरएसएस के कैडरों का जमावड़ा लगना शुरु हो गया है। सबसे पहले आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैघ का आगमन हुआ जिन्होने आरएसएस की उपलब्धियों पर व्याख्यान दिया। इस दौरान जब छात्रों ने सवाल के ज़रिए मनमोहन वैघ को घेरना चाहा तो कुलपति ने हस्तक्षेप करते हुए छात्रों से सिर्फ वैघ जी को सुनने के लिए कहा। डाक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के निदेशक और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तरुण विजय भी यहां के छात्रों को पत्रकारिता के गुर सिखा कर जा चुके हैं। संघ के भारतीय नक्शे के मुताबिक मध्य प्रदेश के एक प्रांत मध्य भारत के प्रांत कार्यवाहक हेमंत मुक्तिबोध भी विश्वविघालय का दौरा कर चुके हैं। हिंदु कैलेंडर के अनुसार नए साल के मौके पर नव वर्ष प्रतिपदा का महत्व विषयक गोष्ठी में हेमंत मुक्तिबोध ने अपने विचार छात्र छात्राओं के साथ साझा किया।

माखन लाल चतुर्वेदी के जन्म दिवस यानी चार अप्रैल को कुठियाला ने एक भव्य कार्यक्रम भोपाल के समन्वय भवन में आयोजित करवाया जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियां विषयक गोष्ठी में बोलने के लिए असम और जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल लेफ्टीनेंट जनरल एस के सिन्हा पधारे। याद रहे कि यह वही एस के सिन्हा हैं जिन्होने 90 के दशक में असम में शांति के नाम पर न जाने कितनों को कत्ल करवा दिया। यह वही एस के सिन्हा हैं जिनपर जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने आरोप लगाया था कि मालेगांव धमाकों का आरोपी दयानंद पाण्डेय 2007 में जम्मू कश्मीर के राज भवन में इनका मेहमान था। दिलचस्प है कि पत्रकारिता के पुरोधा के जन्म दिवस पर मुख्य अतिथि एस के सिन्हा माखन लाल का स्मरण करने के बजाए बाहरी और आंतरिक चुनौतियों को पहचानने की वकालत कर रहे थे।

माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविघालय को संघ का अखाड़ा बनाने पर आमादा बीके कुठियाला अति महत्वाकाक्षीं ब्राहम्ण होने के साथ साथ संघ में गहरी पैठ रखते हैं। सूत्र बताते हैं कि कुठियाला की नियुक्ति में संघ ने निर्णायक भूमिका निभाई थी। प्रदेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को दिल्ली बुलाकर संघ ने कुठियाला की नियुक्ति का आदेश दिया था। विश्वविघालय में नए कुलपति के लिए प्रदेश मुख्यमंत्री ने तीन सदस्यीय कुलपति खोज कमेटी बनाई थी जिसमें भाजपा के पूर्व राज्य सभा सांसद चंदन मित्रा, पत्रकार नंद किशोर त्रिखा और राधेश्याम शर्मा शामिल थे। आमतौर पर किसी भी विश्वविघालय में कुलपति के तलाश के लिए बनाई गई सर्च कमेटी के सदस्यों का उस विश्वविघालय से सम्बंध नहीं होता है लेकिन इस कमेटी के तीनों सदस्य विश्वविघालय से सीधे तौर पर जुड़े थे। नंद किशोर त्रिखा जहां विश्वविघालय की अकादमिक परिषद के सदस्य थे वहीं राधेश्याम शर्मा प्रबंध उप समिति के सदस्य थे। चंदन मित्रा दिल्ली में पायनियर मीडिया स्कूल को चलाते हैं जो माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविघालय से ही संबद्ध है। दिलचस्प बात यह है कि ब्राह्मण के नाम पर बने विश्वविघालय में कुलपति की तलाश के लिए बनी कमेटी में बहुमत ब्राह्मण सदस्यों का था जिसने कुलपति के रुप में संघ की प्रष्ठभूमि वाले ब्राह्मण को ही चुना।

यहां यह जानना भी बेहद ज़रुरी है कि प्रोफेसर ब्रज किशोर कुठियाला सिर्फ एम ए पास हैं वो भी पत्रकारिता में नहीं बल्कि समाजशास्त्र और मानवशास्त्र में। सूत्रों की माने तो प्रोफेसर कुठियाला के एम ए में अंक भी संतोषजनक नही है लेकिन कुठियाला के बायोडेटा में दी गई सूचनाओं के मुताबिक वह देश में मीडिया के सर्वाधिक प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान में प्रशिक्षण लिया है और उसी संस्थान में 21 साल तक शिक्षक रहे हैं। इसके इतर वह यूजीसी, इग्नू, एनसीइआरटी, 16 विश्वविघालयों और 22 उच्च शिक्षण संस्थानों में सक्रिय रुप से सहयोग भी देते रहे हैं। देश के उच्च कोटि के शिक्षण संस्थानों को सेवा देने वाले प्रोफेसर कुठियाला गुरु श्रेष्ठ एंव सर्वश्रेष्ठ संचारक जैसे पुरुस्कार से सम्मानित हो चुके हैं।

दरअसल बीके कुठियाला के 38 सालों के सफल कैरियर पर हमेशा संघ की कृपा रही है। कुठियाला अपनी युवा अवस्था से ही संघ की सेवा करते रहे और संघ इन्हे पुरुस्कृत करता रहा। सूत्रों के अनुसार, आरएसएस ने गोधरा कांड की जांच करने और रिपोर्ट बनाने के लिए एक कमेटी बनाई थी जिसके सदस्य कुठियाला भी थे। इसके अलावा वह आरएसएस की समाचार एजेंसी हिन्दुस्तान समाचार के सदस्य हैं। संघ के ही एक पत्रकार और कुठियाला के मित्र श्याम खोसला चंडीगढ़ में पंचनाद नाम से एक संस्थान चलाते हैं जहां गीता में संचार के महत्व का का पाठ पढ़ाया जाता है, कुलपति महोदय इस संस्थान के निदेशक हैं।

संघ के इस सिपाही की पंहुच कहां तक है इसकी ताज़ा मिसाल कुछ दिन पहले देखने को मिली। भारतीय प्रेस परिषद पत्रकारिता के लिए एक आदर्श पाठ्यक्रम बनाने की तैयारी कर रहा है। इस काम के लिए प्रबुद्ध पत्रकारों और पत्रकारिता के शिक्षकों की एक कमेटी बनाई गई है जिसका समन्यवक बीके कुठियाला को बनाया गया है। पत्रकारिता की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था में संघ की घुसपैठ एक बड़े खतरे की ओर इशारा करती है। चिंता की बात यह है कि क्या भारतीय प्रेस परिषद को कुठियाला की प्रष्ठभूमि का पता नहीं है और अगर है तो इतने महत्वपूर्ण पद की ज़िम्मेदारी उसे कैसे सौंप दी गई। रोचक बात यह है कि कमेटी में देश के नामवर पत्रकार और शिक्षक भी जुड़े हैं लेकिन उनमें से भी किसी ने इसके खिलाफ आवाज़ नहीं उठाई। कुठियाला की समन्यवक के पद पर नियुक्ति और कमेटी के सदस्यों की चुप्पी बताती है कि देश में पत्रकारिता जैसे “पवित्र पेशे” के साथ क्या हो रहा है और भविष्य में क्या होगा।

खैर, माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविघालय में 2009-10 का सत्र खत्म होने वाला है। नए सत्र में होने वाले भव्य यज्ञ के लिए विशेष अतिथियों की फेहरिस्त तैयार की जा रही है। छात्रों से कहा जा रहा है कि चाहो तो विश्वविघालय परिसर में शाखा लगा सकते हो, मैं भी आउंगा। प्रोफेसर बीके कुठियाला पत्रकारिता के छात्रों के लिए गणवेश डिज़ाइन कर रहे हैं जिसका रंग खाकी और सफेद होगा।

Shahnawaz Nazeer
Dainik Bhasker
07869106127

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2 Responses to पत्रकारिता के विश्वविद्यालय में संघ की घुसपैठ: शहनवाज़ नज़ीर

  1. aditya dev tyagi says:

    s. Nazzer ji ka aalekh porvagrah se prerit hai fir bhi esme padhne layak yeh hai ki Kuthiyala ji ke vishay me vistar se shodh kiya hai.

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