Monthly Archives: अक्टूबर 2010

कल तोड़ी गई, आज बँटी हूँ

कल टूटा था, आज बँटा हूँ। कहना न होगा मैं क्या हूँ।। चले चलो! चरैवेति! आगे बढ़ो, यार! मूव ऑन! कितना आसान है ये सब कहना, कितना मुश्किल है उस पर अमल करना, जो कि अक्सर हर महान सूक्ति के … Continue reading

Posted in Culture, Law, Media politics, Violence | Tagged | 1 टिप्पणी